हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता भगवान गणेश को भारतीय संस्कृति में सबसे पहले पूज्य देवता माना जाता है, और उनकी पूजा शुभ आरंभ के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
गणेश नाम का उत्पत्ति दो शब्दों को मिलाकर किया गया हुआ है – “गण” एक बड़े समूह को संदर्भित करता है, जबकि “ईश” भगवान को संदर्भित करता है, इसलिए भगवान गणेश को लोगों का देवता कहा जाता है। भगवान गणेश को मोदक और लड्डू अति प्रिय हैं।
भगवान गणेश को गणपति, विघ्नहर्ता, विद्यापति, लंबोदर, एकदंत आदि नामों से भी जाना जाता है।
Who Is Lord Ganesha/कौन है भगवान गणेश ?
भगवान गणेश महादेव एवं माता पार्वती के ज्येष्ट पुत्र है।
Story of Birth Lord Ganesha/भगवान गणेश कि जन्म कथा।
एक समय की बात है, देवी पार्वती स्नान के लिए महल में जा रही थी तब उन्होनें नन्दी को द्वार पर नियुक्त कर कहा कि मेरे आदेश के बिना कोई भी अंदर न आ पाय। तब नंदी द्वार पर पहरा देने लगे तभी वहा महादेव आ गए।
नंदी ने महादेव से कहा माता ने किसी को भी अन्दर न आने का आदेश दिया हैं, इस पर महादेव ने कहा वो किसी और के लिए है मेरे लिए नही यह कह कर अन्दर चले गए।
माता पार्वती को यह बात अच्छी नहीं लगी। तब माता ने अपने शरीर में लगे हल्दी एवं कुमकुम के लेप को निकालकर एक बच्चे कि आकृती बनाई और उसमें प्राण दिये। इस तरह भगवान गणेश का जन्म हुआ।
भगवान गणेश पर लगे हाथी कि सिर कि कहानी:-

भगवान गणेश के जन्म के अगले दिन, देवी पार्वती ने अपने पुत्र को द्वारपाल नियुक्त कर महल में काम कर रही थी।
कुछ ही देर बाद, महादेव कुछ अत्यावश्यक काम हेतु महल के लिए आए, लेकिन, गणेश उन्हें रोक दिया। भगवान महादेव ने भगवान गणेश को समझाने का प्रयास किया लेकिन विफल रहे। महादेव ने अपने गणांे को बच्चे को द्वार से हटाने के लिए आदेश दिया।
गणों के बहुत प्रयास के बाद भी गणेष नही हटे आखिरकार उन्हें निराश होकर चले जाना पडा। यह देख महादेव ने उन्हें बल पूर्वक हटाने का आदेश दिया। इससे भगवान गणेश और भगवान महादेव के गणो के बीच युद्ध हुआ। भगवान गणेश ने महादेव के भक्तों को हारा दिया। सभी देवताओं, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने महादेव की मदद के लिए आए, लेकिन गणेष के माता का दिये आदेश के आगे किसी कि नहीं सुनी।
अंततः यह देख महादेव कोधित हो गए और गणेश पर त्रिशूल से प्रहार कर दिया, प्रहार से गणेष का सर धड से अलग हो गया।
जब देवी पार्वती इसके बारे में सुनी, तो वह बाहर दौड़ आई और रोते हुए अपने पुत्र को जीवीत करने को कहा।
तब सारे देव चिंतित हो पडे क्योकि महादेव के त्रिषूल से कटा हुआ सर नहीं जोडा जा सकता था। यह देख ब्रह्मा जी ने एक युक्ति निकाली और महादेव के गण को आदेष दिया कि जो भी माता अपने पुत्र के सिर के विपरीत दिषा मे पीठ कर सो रही हो उस बच्चे का सिर ले आओ।
आदेश पाकर सभी गण खोज में निकल पडे, कुछ देर बाद वो हाथी के बच्चे के सिर साथ लौटे। महादेव ने सिर को बच्चे के ऊपर रखा और उसे जीवित किया। सभी देवताओं और देवियों ने गणेश को आशीर्वाद दिए।
कैसे बने भगवान गणेश प्रथम पूजनीय भगवान ?

एक समय की बात है, सभी देवताओं ने वारंवार बहस की कि प्रत्येक शुभ कार्य की शुरुआत में किसकी पूजा करनी चाहिए?
जब बहस ज्यादा हो गई, तो संत नारद ने देवताओं को समाधान ढूंढने के लिए महादेव के पास जाने की सलाह दी।
महादेव ने कहा कि किसी की अधिकता का निर्णय क्षमता द्वारा किया जाएगा। भगवान महादेव ने एक प्रतियोगिता का सुझाव दिया जिसमें सभी प्रतियोगी को पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करनी थी और जो पहले परिक्रमा पूरा करता, वह विजेता माना जाता।
जैसे ही भगवान महादेव ने इस प्रतियोगिता का ऐलान किया, सभी देवताओं ने अपने वाहनों पर सवार होकर परिक्रमा हेतु निकल पडे।
लेकिन भगवान गणेश को एक इंच भी नहीं हिले। कुछ समय बाद, भगवान गणेश ने अपने वाहन पर चढ़ा और भगवान महादेव और देवी पार्वती की परिक्रमा की। जब भगवान महादेव ने भगवान गणेश से इसके पीछे कारण पूछा,
तो उन्होंने कहा बच्चे के लिए पिता आकाश होता है और माता पृथ्वी एवं आप और देवी पार्वती पूरा ब्रह्मांड हैं, आपके बाहर कुछ नहीं है। दूसरों ने भी गणेश के तर्क को सुना मोन हो गए।
इस तरह भगवान गणेश पहले पूजनीय देवता बन गए।
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